तरक्की का सफ़र

लेखक: राज अग्रवाल


 भाग-९


 

प्रीती अब बहुत खुश थी कि उसने महेश से अपना बदला ले लिया था। एक दिन उसने मुझसे कहा, “राज! मुझे अब एम-डी से बदला लेना है, लेकिन कोई उपाय नहीं दिख रहा।”

 

“तुम रजनी को सीढ़ी क्यों नहीं बनाती मैंने सलाह देते हुए कहा, “एम-डी उसे अपनी बेटियों से भी ज्यादा प्यार करता है।”

 

“हाँ!!! मैं भी यही सोच रही थी”, प्रीती ने जवाब दिया।

 

“लेकिन एक चीज़ ध्यान में रखना, वो पढ़ी लिखी और समझदार लड़की है, मीना और मेरी बहनों की तरह बेवकूफ़ नहीं।”

 

“क्या तुम उसे प्यार करते हो उसने पूछा।

 

“बिल्कुल भी नहीं! पर हाँ मुझे उससे हमदर्दी जरूर है, वो मेरी पहली कुँवारी चूत थी।” मैंने जवाब दिया।

 

“ठीक है... मैं चाँस लेती हूँ! लगता है मैं उसे समझाने में और मनाने में कामयाब हो जाऊँगी”, प्रीती ने कहा।

 

प्रीती के बुलाने पर एक दिन शाम को रजनी हमारे घर आयी। मैंने देखा कि वो बातें करने में झिझक रही थी ।

 

“रजनी! इसके पहले कि मैं तुम्हें बताऊँ कि मैंने तुम्हें यहाँ क्यों बुलाया है और मैं तुमसे क्या चाहती हूँ, ये जान लो कि मुझे तुम्हारे और राज के बारे में सब मालूम है और मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा।”

 

रजनी कुछ बोली नहीं और चुप रही।

 

“लेकिन एक बात मुझे पहले बताओ, क्या राज के बाद तुमने किसी से चुदवाया है प्रीती ने पूछा।

 

रजनी ने झिझकते हुए मेरी ओर देखा और मैंने गर्दन हिला कर उसे सहमती दे दी।      इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

“प्रीती, अगर तुम इतने खुले रूप में पूछ रही हो तो मैं बताती हूँ कि मैंने अपने कॉलेज के दो लड़कों से चुदवाया है पर राज जैसा कोई नहीं था।”

 

“मैं जानती हूँ! राज से चुदवाने में जो मज़ा आता है वो किसी से भी नहीं आता”, प्रीती ने जवाब दिया।

 

“अच्छा... अब मुझे बताओ तुमने मुझे यहाँ क्यों बुलाया है रजनी ने पूछा।

 

प्रीती भी सीधे विषय पर आते हुए बोली, “रजनी! मैं चाहती हूँ कि तुम एम-डी से चुदवा लो

 

“तुम्हारा दिमाग तो नहीं खराब हो गया है? तुम चाहती हो कि मैं अपने अंकल के साथ सोऊँ???” रजनी अपनी जगह से उठते हुए बोली।

 

“रजनी रुको! एक बार हमारी बात तो सुन लो”, मैंने उसे रोकना चाहा।

 

“ठीक है राज! तुम कहते हो तो मैं रुक जाती हूँ। अब बताओ, तुम क्या कहना चाहते हो रजनी अपनी जगह पर बैठते हुए बोली। रजनी के बैठते ही प्रीती ने पूरी दास्तान रजनी को सुना दी और ये भी बता दिया कि किस तरह महेश और एम-डी ने ऑफिस की सभी लड़कियों और औरतों को चोदा है।

 

सारी बात सुनने के बाद रजनी बोली, “मैं इसमें कुछ गलत नहीं मानती, वो पैसे वाले हैं और उन्होंने इंसान की कमजोरियों का फ़ायदा उठाया है, किसी के साथ जबरदस्ती तो नहीं की। गल्ती उनकी है जो राज़ी हो गये।”

 

“तुम नहीं जानती हो रजनी! एम-डी ने कैसे कुँवारी चूत को चोदने के लिये कई लोगों को फंसाया और धमकाया है!” प्रीती बोली।

 

“मैं नहीं मानती कि अपनी हवस मिटाने के लिये मेरे अंकल किसी भी हद तक गिर सकते हैं।”

 

“ठीक है! मैं तुम्हें विस्तार में बताती हूँ। तुम असलम को तो जानती होगी, हमारे ऑफिस में पियन का काम करता था।”

 

“वही असलम ना जिसे चोरी के इल्ज़ाम में पकड़ा गया था और फिर छूट गया था

 

“हाँ वही! लेकिन तुम्हें हकीकत नहीं मालूम प्रीती ने कहा।

 

“मैं और माँ जानते थे कि असलम निर्दोष है, इसलिये हमने अंकल से रिक्वेस्ट भी की थी कि उसे छोड़ दें।”

 

प्रीती रजनी की बात सुन कर हंसने लगी। “मैं तुम्हें हकीकत बताती हूँ”, प्रीती ने कहा, “एक दिन तुम्हारे अंकल ने मुझे अपने ऑफिस में बुलाया और कहा कि प्रीती, मैं असलम पर से सारे इल्ज़ाम वापस ले लूँगा अगर उसकी बेटी आयेशा चुदवाने को तैयार हो जाये। मुझे बुरा लगा और मैंने एम-डी को मना करना चाहा, तो उन्होंने गुस्से में कहा, तुम्हें ये काम करना है तो करो नहीं तो मैं किसी और से करवा लूँगा। उसकी चूत किसी ना किसी दिन तो फटनी ही है तो मैं क्यों ना करूँ। एम-डी मुझे इन सब काम के लिये पैसे दिया करता था तो मैंने सोचा क्यों ना मैं भी पैसा कमा लूँ”, प्रीती आगे बोली।

 

“मैं दूसरे दिन आयेशा को समझा बुझा कर और अच्छे कपड़ों और मेक-अप में तैयार करके तुम्हारे अंकल के सूईट, होटल शेराटन में लेकर पहुँच गयी। तुम्हारे अंकल और महेश ने बुरी तरह उसकी चूत को चोदा और उसकी गाँड भी फाड़ दी और वो बेचारी अपने बाप को बचाने के लिये हर ज़ुल्म सहती गयी।”

 

“प्लीज़ प्रीती! मुझे और नहीं सुनना है”, रजनी ने अपने हाथ अपने कान पर रखते हुए कहा।      इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

“नहीं! तुम्हें पूरी बात सुननी होगी। तुम्हें नहीं मालूम महेश और एम-डी ने कितनी लड़कियों को अपने जाल में फंसाया है

 

“नहीं!!! मुझे और नहीं सुनना और मैं तुम पर अब विश्वास करती हूँ, मैं तुम्हारा साथ देने को तैयार हूँ, मुझे बताओ मुझे क्या करना है रजनी बोली।

 

“ये मैंने पहले ही सोच रखा है, मैं एम-डी से कहुँगी कि तुम एक गरीब घर की गाँव की रहने वाली लड़की हो और तुम्हें अपनी विधवा माँ के इलाज के लिये पैसे चाहिये, तुम पैसों की तंगी की वजह से अपनी चूत तो दे चुकी हो लेकिन तुम्हारी गाँड अभी भी कुँवारी है।”

 

“वो तो अब भी है!” रजनी ने हँसते हुए कहा।

 

“मैं जानती हूँ, इसलिये जानती हूँ कि एम-डी तैयार हो जायेगा। मैं ये भी शर्त रखुँगी कि तुम अंधेरे में चुदवाना चाहती हो”, प्रीती ने कहा।

 

“ये सब तो ठीक हो जायेगा पर क्या राज ने आयेशा को चोदा था

 

“हकीकत में हाँ! लेकिन ये अलग कहानी है”, प्रीती ने जवाब दिया।

 

“बताओ मुझे, मैं जानना चाहती हूँ”, रजनी बोली।

 

“करीब पंद्रह दिन के बाद आयेशा मेरे घर आयी और बोली कि वो प्रेगनेंट है। मैंने उससे कहा कि अगर वो इस मुश्किल से बचना चाहती है तो उसे राज से चुदवाने पड़ेगा। वो मान गयी क्योंकि उसके पास दूसरा चारा नहीं था”, प्रीती ने कहा, “राज ने उस दिन उसे बड़े ही प्यार से चार बार चोदा। पहले तो वो उसका लौड़ा देख कर डर ही गयी थी, दीदी! इनका लंड तो कितना मोटा और लंबा है..... मैं तो मर ही जाऊँगी? मैं भी तो इनसे रोज़ चुदवाती हूँ और अभी तक जिंदा हूँ मैंने जवाब दिया। राज ने उसे बहुत ही नाजुक्ता और प्यार से चोदा, ऐसा चोदा कि वो इसके लंड कि दिवानी हो गयी। दूसरे दिन मैंने उसे डॉक्टर के पास ले जा कर उसका अबार्शन करा दिया। वो राज के लंड कि इतनी दिवानी हो गयी कि बराबर हमारे घर राज से चुदवाने के लिये आने लगी। इसी बीच राज ने उसकी गाँड का भी उदघाटन कर दिया।”

 

“क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता कि राज दूसरी लड़कियों को चोदता हैरजनी ने पूछा।

 

“नहीं, जब तक वो मुझे बताकर करता है, मैं जानती हूँ वो मुझे भी चुदाई का मज़ा दे सकता है और दूसरों को भी और फिर मैं भी तो दूसरे मर्दों से चुदवाती हूँ”, प्रीती बोली।

 

“फिर तो मैं भी अपनी गाँड का उदघाटन राज से ही करवाना चाहुँगी!” रजनी उत्सुक्ता से बोली।

 

“नहीं रजनी! तुम्हारी गाँड तुम्हारे अंकल के लिये ही रहने दो... हाँ तुम राज से अपनी चूत चुदवा सकती हो! एक शर्त पर कि, मेरे सामने चुदवाओ!” प्रीती ने जवाब दिया।

 

“ये तो बहुत ही अच्छी बात है, हाँ अगर तुम हमारा साथ दो तो और मज़ा आयेगा”, रजनी ने कहा।

 

थोड़ी ही देर में मैं दो सुंदर औरतों के साथ नंगा बिस्तर पर था जिनकी चूत का उदघाटन मैंने ही किया था।

 

जैसे ही मेरा लंड रजनी की चूत में दाखिल हुआ, वो कामुक्ता भरी आवाज़ में बोल उठी, “ओहहहहहह राज तुम्हारा लंड कितना अच्छा है।” प्रीती हमें देख रही थी और उसने अपने हाथों को रजनी की चूत के पास रखा हुआ था, जिससे मेरा लंड उसके हाथों से होकर रजनी की चूत में जा रहा था।

 

थोड़ी ही देर में रजनी मस्ती में आ गयी थी। वो अपने कुल्हे उछाल कर मेरी थाप से थाप मिला रही थी। उसके मुँह से उन्माद भरी आवाज़ें निकल रही थी, “हाँआँआआआ राज!!! ऐसे ही चोदते जाओ, और तेजी से राआआआजा हाँआँ मज़ाआआआआ आ रहा है...... और जोर से।”

 

उसकी कामुक्ता भरी बातें सुन कर मेरे लंड में भी उबाल आने लगा। मैंने अपने धक्कों की रफ़्तार धीमी कर दी। तभी उसने कहा“ओहहहहह राज रुको मत..... मेरा थोड़ी देर में ही छूटने वाला है, हाँआँआँ राजा और जोर से, प्लीज़ और जोर से...... कितना मज़ा आ रहा है।” यह कहते हुए उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। मैंने भी दो चार धक्के लगा कर अपना वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और हम अपनी अपनी साँसें संभालने लगे।

 

“तुम दोनों की चुदाई देख कर अब मुझसे रहा नहीं जाता, प्लीज़ राज! मेरी चूत की भी प्यास बुझा दो।” प्रीती ने मेरे लंड को पकड़ते हुए कहा।

 

“जान मेरी! थोड़ा वक्त तो दो.... फिर मैं तुम्हारी अभी की प्यास तो क्या..... जनमों की प्यास बुझा दूँगा”, मैंने जवाब दिया।

 

प्रीती मेरा लंड अपने मुँह में लेकर जोर से चूसने लगी। जब मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया तो मैंने इतनी जोर से उसे चोदा कि वो तीन बार झड़ गयी।

 

हम लोग अपनी उखड़ी हुई साँसों पर काबू पाने की कोशिश कर रहे थे कि रजनी ने अपने होंठ प्रीती की चूचियों पर रख कर चूसना शुरू कर दिया।

 

“ऊऊऊऊहहहहह ये क्या कर रही हो प्रीती बोली, लेकिन उसकी बातों को अनसुना कर के रजनी नीचे की ओर बढ़ती हुई अपनी जीभ को उसकी चूत पर रख कर चाटने लगी।

 

प्रीती कि सिसकरियाँ तेज हो रही थी, “हाँआआआआआ ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ माँआँआआआआआआआ ये तुम क्या कर रही हो रजनी...... हाँ और जोर से चाटो”, कहते हुए प्रीती ने अपना पानी रजनी के मुँह में छोड़ दिया।      इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

इन दोनों की हरकत देख कर मेरा लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया। “तुम में से पहले कौन इसका मज़ा लेना चाहेगा मैंने अपना लंड हिलाते हुए कहा।

 

“पहले प्रीती को चोदो”, कहकर रजनी ने मेरे लंड को प्रीती की चूत के छेद पर लगा दिया।

 

उस दिन मैंने कई बार बदल-बदल कर दोनों को चोदा।

 

“तो फिर कब मिलना है रजनी ने कपड़े पहनते हुए कहा।

 

“शनिवार की रात को, क्यों ठीक रहेगा ना

 

“ठीक है! शनिवार को मिलेंगे”, कहकर रजनी अपने घर चली गयी।      इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

शनिवार की शाम को मैंने सूईट के सब बल्ब निकाल दिये और खिड़की पर काले पर्दे चढ़ा दिये जिससे कमरे में अंधेरा हो और एम-डी रजनी को पहचान नहीं पाये।

 

“सर! आप अपने कपड़े उतार कर रूम में जा सकते हैं, नयी चूत आपका इंतज़ार कर रही है!” प्रीती ने एम-डी से कहा।

 

अपने कपड़े उतार कर एम-डी बेडरूम में दाखिल हो गया। “राज! मैं सब सुनना चाहती हूँ और रिकॉर्ड भी करना चाहती हूँ”, प्रीती ने अपने लिये एक बड़ा पैग ले कर सोफ़े पर बैठते हुए कहा।

 

मैंने टीवी का स्विच ऑन किया और देखने लगा। एम-डी अपना लंड रजनी की चूत में घुसा चुका था। “मैं तुम्हारी चूत के भी पैसे दे देता अगर तुम मेरे पास पहले आ जाती”, कहते हुए एम-डी रजनी की चूत को चोद रहा था।

 

रजनी के मुँह से कामुक सिसकरियाँ निकल रही थी। एम-डी अपना पूरा जोर लगा कर रजनी की चूत को चोद रहा था।

 

“तुझे चुदाई अच्छी लग रही है ना एम-डी ने पूछा।

 

“हाँआँआआ”, रजनी बोली।

 

“लगता है रजनी को मज़ा आ रहा है!” मैंने प्रीती से कहा।

 

“हाँ! एम-डी चुदाई बहुत अच्छे तरीके से करता है”, प्रीती ने सिगरेट का कश लेकर मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही दबाते हुए कहा।

 

टीवी पर रजनी की सिसकरियाँ गूँज रही थी, “ओहहहहहहह हाँआँआआआआआ जोर से... हाँआँआँ ऐसे ही।”

 

थोड़ी देर बाद कमरे में एक दम खामोशी सी छा गयी थी। सिर्फ़ उन दोनों की साँसों की आवाज़ आ रही थी।

 

“लगता है दोनों का काम हो गया है!” प्रीती बोली। प्रीती का तीसरा पैग चल रहा था और वो चेन स्मोकर की तरह लगातार सिगरेट पे सिगरेट फूँक रही थी।

 

इतने में एम-डी ने कहा, “काश तुम मेरे पास पहले आ जाती तो मैं तुम्हारी कुँवारी चूत चोद पाता, फिर भी तुम्हारी चूत अभी भी कसी हुई है। कोई बात नहीं..... चलो अब घोड़ी बन जाओ, अब मैं तुम्हारी गाँड मारूँगा।”

 

“म....म...म..म...म नहीं!!” रजनी ने थोड़ा विरोध किया।

 

“तुम डरो मत! मैं धीरे-धीरे करूँगा...... तुम्हें तकलीफ नहीं होगी”, एम-डी ने रजनी की चूचियों को सहलाते हुए कहा।

 

रजनी घोड़ी बन गयी और एम-डी ने अपना लंड उसकी कुँवारी गाँड में डाल दिया।

 

“ओहहहहहहह मर गयीईईईईई, निकालो बहुत दर्द हो रहा है, ऊऊऊऊऊऊऊऊ माँआँआआ”, रजनी की चींख सुनाई दी।

 

“राज! एम-डी ने रजनी की कुँवारी गाँड फाड़ दी लगता है!” अपनी सिगरेट एश-ट्रे में टिका कर और ग्लास टेबल पर रख कर प्रीती मेरे लंड को पैंट में से निकालते हुए बोली। “तुम्हारा लंड कितना तन गया है और मेरी भी चुदाई की इच्छा हो रही है.... मुझे चोदो ना.... देखो मेरी चूत कैसे बह रही है।”

 

मैं प्रीती को सोफ़े पर लिटा कर, कसके उसकी चुदाई करता रहा।

 

दो घंटे के बाद एम-डी बेडरूम से बाहर आया और अपने कपड़े पहन लिये। “प्रीती! तुम भी कमाल की औरत हो, कहाँ कहाँ से ढूँढ के लाती हो इतनी कुँवारी चूतों को? मज़ा आ गया!” एम-डी ने कहा, “उससे पूछो कि क्या वो और दस हज़ार कमाना चाहेगी

 

“आप अपने आप क्यों नहीं पूछ लेते रजनी ने कमरे में नंगे ही आते हुए पूछा।

 

“ओह गॉड! ये तुम थीं!” एम-डी ने रजनी को देखते हुए कहा।      इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

“हाँ मेरे प्यारे अंकल! ये सुन कर अच्छा लगा कि आपको मुझे चोदने में मज़ा आया.... मैं फिर से चुदवाना चाहती हूँ”, रजनी ने हँसते हुए कहा।

 

एम-डी धम से सोफ़े पर बैठ गया और अपने आपको कोसने लगा, “ये मैंने क्या किया? अपनी बेटी समान भतीजी को ही चोद दिया, हे भगवान मुझे माफ़ कर देना।” फिर वो प्रीती पर गुस्से से चिल्लाया, “ये सब तुम्हारा किया धरा है.... तुम क्या ये सब मज़ाक समझती हो

 

“हाँ! ये सब मैंने ही किया है। मैंने ही रजनी को तुमसे चुदवाने के लिये तैयार किया। जिस तरह तुमने मुझे चोदने के लिये मेरे पति को ब्लैकमेल किया था.... ये उसका बदला है”, प्रीती जोर जोर से हँस रही थी।

 

एम-डी प्रीती को गालियाँ दे रहा था, “कुतिया..... रंडी..... साली..... तूने ऐसा क्यों किया फिर रजनी की तरफ पलटते हुए बोला, “मैंने तुम्हारे साथ ऐसा क्या किया जो तुम इसके लिये तैयार हो गयी

 

“मेरे साथ नहीं किया, पर दूसरों के साथ तो करते आये हो! असलम को भूल गये? कैसे उसे चोरी के इल्ज़ाम में फँसा कर उसकी बेटी आयेशा को आपने और महेश ने चोदा था”, रजनी खीझती हुई बोली।

 

“ये सब झूठ है, इन्होंने तुम्हें बहकाया है”, एम-डी ने कहा।

 

“आप रहने दें, झूठ बोलने से कोई फ़ायदा नहीं है, मुझे सचाई का पता है, आप यहाँ से प्लीज़ जायें, मुझे आपको अपना अंकल कहते हुए भी शरम आ रही है।”

 

एम-डी चुपचाप उठा और धीमे कदमों से सूईट से बाहर चला गया।

 

“हम लोगों ने कर दिखाया”, रजनी खुशी से चिल्लाते हुए बोली।      इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

“हाँ कर तो लिया.... पर तुमने देखा एम-डी का चेहरा कैसे उतर गया था, मुझे दुख है लेकिन उसे सबक भी सिखाना जरूरी था”, प्रीती अपना ग्लास हवा में लहराते हुए बोली, “रजनी ये पैसे तुम रख लो... तुम्हारे हैं जो एम-डी ने तुम्हें चोदने के लिये दिये थे।”

 

“नहीं मुझे इनकी जरूरत नहीं है..... इसे तुम ही रखो”, रजनी ने पैसे लौटाते हुए कहा।

 

“तो फिर इनका क्या करें, ऐसा करते हैं ये पैसे असलम को दे देते हैं, कहेंगे आयेशा की शादी में काम आयेंगे”, प्रीती ने कहा।

 

“हाँ! ये ठीक रहेगा! लेकिन अब क्या करें रजनी बोली।

 

“तुम लोगों को जो करना है करो..... मुझे तो एम-डी पर दया आती है, मैं घर जाकर सोना चाहता हूँ।”

 

“ठीक है”, कहकर प्रीती ने रजनी को भी घर भेज दिया और हम लोग घर आकर सो गये।

 

दूसरे दिन एम-डी ऑफिस में नहीं आया। घर फोन करने पर पता लगा कि उनकी तबियत खराब है। एम-डी की तबियत दिन पर दिन खराब रहने लगी और उन्हें हॉसपिटल में भरती करना पड़ा।

 

ऑफिस का काम मैंने संभल लिया था। इसी तरह महीना गुजर गया। सब कुछ वैसे ही चल रहा था। मैं ऑफिस की औरतों को चोदता और प्रीती भी क्लबों और पार्टियों में दूसरे मर्दों से चुदवा कर ऐश कर रही थी।

 

एक दिन मैंने एम-डी को फोन किया, “सर! मैं राज बोल रहा हूँ, अब आपकी तबियत कैसी है

 

“मैं ठीक हूँ राज! एक काम करो... आज रात आठ बजे तुम मुझे मेरे सूईट में मिलो? ठीक टाईम पर पहुँच जाना, तुम आओगे ना एम-डी ने कहा।

 

“बिल्कुल पहुँच जाऊँगा सर”, मैंने जवाब दिया।

 

ठीक टाईम पर मैं सूईट में दाखिल हुआ तो क्या देखता हूँ कि एम-डी एकदम नंगा सोफ़े पर बैठा था, और दो औरतें, जो कि बिल्कुल नंगी थीं, उसके लंड को चूस और चूम रही थी।

 

“आओ राज!” एम-डी ने मेरी तरफ हाथ हिलाते हुए कहा।

 

एम-डी को बोलते सुन दोनों औरतें अपना नंगा बदन छुपाने के लिये सोफ़े के पीछे जा छुपीं। उनका सिर्फ़ चेहरा दिखायी दे रहा था। मैंने उन दोनों को पहचान लिया। एक एम-डी की पत्नी मिली थी और दूसरी रजनी कि मम्मी, मिसेज योगिता थी।      इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

“रजनीश! ये कौन है और यहाँ क्यों आया है? इसे फ़ौरन यहाँ से जाने को बोलो!” मिसेज मिली चिल्लाते हुए बोली और मिसेज योगिता ने शरमा कर अपनी गर्दन झुका रखी थी।

 

उसकी बातों को अनसुना कर के एम-डी ने कहा “राज! तुम इन दोनों से पहले भी मिल चुके हो..... लेकिन फिर भी मैं इनसे तुम्हारा परिचय कराता हूँ। ये मेरी बीवी मिली है और बिस्तर में भी उतना ही मिल जाती है, और ये मेरी दूर की कज़िन योगिता है...... ये थोड़ी शर्मिली है, लेकिन इसकी चूत एक दम आग का गोला है..... योगिता ये मिस्टर  राज हैं...... हमारे अकाऊँट्स के जनरल मैनेजर।”

 

“आप दोनों से मिलकर खुशी हुई”, मैंने कहा।

 

दोनों औरतों ने कुछ नहीं कहा और चुपचाप रही।

 

एम-डी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा, “राज! मैंने तुम्हारी पत्नी और बहनों को चोदा है, आज मैं हिसाब बराबर कर देना चाहता हूँ। मैं जानता हूँ कि मेरी पत्नी और बहन तुम्हारी बीवी और बहनों जितनी यंग तो नहीं है, लेकिन जैसी हैं तुम्हारी हैं। तुम चाहो जैसे इन्हें चोद सकते हो।”

 

“तुम्हारा दिमाग तो खराब नहीं हो गया है? तुम अपने नौकर से अपनी बीवी और बहन को चुदवाना चाहते हो मिली चिल्लाते हुए बोली। उसकी आवाज से साफ ज़ाहिर था कि उसने शराब पी रखी थी।

 

“इसके नौकर होने की तुम्हें तकलीफ हो रही है तो ठीक है..... इसे मैं आज से डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करता हूँ, अब तो तुम्हें तकलीफ नहीं एम-डी ने हँसते हुए कहा।

 

“नहीं! मैं तैयार नहीं हूँ!” मिली वापस चिल्लायी। इतनी देर योगिता चुपचाप सब सुन देख रही थी।

 

“तुम तैयार हो कि नहीं...... बाद में देखेंगे।” एम-डी हँसा, “राज जरा इन्हें अपना लंड तो दिखाना!”

 

दोनों औरतें ४० साल के ऊपर थीं, फिर भी उनका बदन गदराया हुआ था और उन्हें चोदने को मेरा दिल मचल उठ था। मैंने अपने कपड़े उतारते हुए अपना लंड दिखाया।

 

“ओह गॉड! कितना मोटा और लंबा लौड़ा है तुम्हारा”, मिली ने अब आगे आकर मेरे लंड को अपने हाथों में जकड़ते हुए कहा। “तुम्हारा लंड तो महेश से भी लंबा है।”

 

“साली कुत्तिया! मेरे पीछे तुम महेश से चुदवाती रही होएम-डी ने हँसते हुए कहा।

 

“हाँ... उसी तरह जैसे तुम उसकी बीवी को चोदते रहते थे”, कहकर मिली मेरे लंड को हिलाने लगी।

 

“योगिता क्या तुम इसके लिये तैयार हो

 

“नहीं! बिल्कुल नहीं!” योगिता बोली।

 

“योगिता प्लीज़ मान जाओ! नहीं तो मुझे राज के लिये किसी और चूत का इंतज़ाम करना होगा, रजनी की चूत कैसी रहेगी? मुझे मालूम है कि राज को रजनी की कुँवारी चूत चोदने में मज़ा आयेगा।” एम-डी हँसते हुए बोला।

 

“मेरी बेटी को इन सबसे दूर रखो! समझे योगिता जोर से चिल्लायी।

 

“तुम सोच लो, या तो तुम्हारी चूत या फिर रजनी की चूत, फैसला तुम्हारे हाथ में है।”

 

एम-डी की बात सुन कर योगिता भी सोफ़े के पीछे से बाहर आ गयी। सिर्फ काले रंग के हाई हील के सैंडल पहने, बिल्कुल नंगी, योगिता बहुत ही सैक्सी लग रही थी। एम-डी उसे देख कर बोला, “अच्छा अब तुम मान ही गयी हो तो राज का जरा अलग अंदाज़ में स्वागत करो।”

 

योगिता घुटने के बल मेरे पास बैठ गयी और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने और चाटने लगी।

 

“चलो अब बेडरूम में चलते हैं”, एम-डी सोफ़े पर से उठते हुए बोला। हम चारों बेडरूम में आ गये। पहले हम सबने दो-दो पैग पीये और फिर मैंने दोनों को खूब चोदा। इतनी उम्र होने के बाद भी दोनों में सैक्स की आग भरी हुई थी। एम-डी सब कुछ देखता रहा। फिर एम-डी के कहने पर मैंने उन दोनों की गाँड भी मारी।

 

मैंने रात को घर पहुँच कर प्रीती को सब बताया तो वो खुश हुई और बोली, “अच्छा है! आज से एम-डी तुम्हें अपने बराबर समझेगा..... नौकर नहीं।”

 

एम-डी जब बिमार था तो रजनी बराबर आती रहती थी और मैं प्रीती के साथ उसकी भी जम कर चुदाई करता था, लेकिन जबसे मैंने उसकी माँ योगिता को चोदा, उसने आना बंद कर दिया था।      इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

एक दिन मैं घर पहुँचा तो देखता हूँ कि रजनी और प्रीती शराब की चुस्कियाँ लेती हुई बातें कर रही हैं।

 

“हाय राज! कैसे हो और आज कल क्या कर रहे हो.... मेरी मम्मी को चोदने के अलावा रजनी बोली।

 

“तो तुम्हें पता चल गया”, मैंने कहा।

 

“तुम्हें कैसे पता चला प्रीती ने पूछा।

 

“वही तो बताने आयी हूँ, राज का ही इंतज़ार कर रही थी”, रजनी बोली।

 

“अब तो राज आ गया है..... चलो शुरू हो जाओ।”

 

“कुछ दिनों से मैं देख रही थी कि मम्मी कुछ खोयी-खोयी सी रहती थी। अब ना तो वो पहले के जैसे हँसती थी और ना ही उनका काम में मन लगता था। पहले वो कभी-कभी ही, पार्टी वगैरह में ड्रिंक करती थीं पर अब कुछ दिनों से रोज़ ड्रिंक करने लगी थीं।”

 

“मेरे बहुत जोर देने पे वो बोलीं, रजनी मेरी बातें सुनकर हो सके तो मुझे माफ़ कर देना..... रजनी! मैं बचपन से ही बहुत सैक्सी थी, मुझे सैक्स हमेशा चाहिये होता था, तुम्हारे पिताजी के मरने के बाद मैं अकेली पड़ गयी और मेरी सैक्स की भूख शाँत नहीं होती थी। एक दिन मेरी एक सहेली ने मुझे रबड़ का नकली लंड खरीद कर लाके दिया।”

 

“मम्मी! आपके पास क्या नकली लंड है? मुझे दिखाओ ना! मैं बीच में बोली।”

 

“अभी नहीं बाद में, मम्मी बोली पर मैंने जोर दिया तो मम्मी बेडरूम से नकली लंड ले आयी.... प्रीती! पूरा दस इंच का काला और मोटा लंड है, अच्छा है पर राज के असली लंड जैसा नहीं।”

 

“आगे क्या हुआ, वो बता”, प्रीती सिगरेट का धुँआ छोड़ती हुई रजनी से बोली।

 

“मम्मी ने बताया कि एक दिन शाम को वो अपने नकली लंड से मज़े ले रही थी कि मेरी आँटी मिली ने उन्हें देख लिया और बोली, ‘योगिता नकली लंड से कुछ नहीं होगा, मेरे पास आओ मैं तुम्हें असली मज़ा दूँगी।’ उसकी बातें सुन कर मम्मी आगे बढ़ी तो उसने उन्हें बाँहों में भर कर चूमना शुरू कर दिया। मम्मी को भी मज़ा आने लगा और थोड़ी ही देर में दोनों एक दूसरे की चूत चाट रही थीं, जब उनका पानी छूट गया तो मम्मी ने मिली आँटी से पूछा, ‘मिली! तुम्हें भी चुदाई का बड़ा शौक है ना?’ ‘हाँ! योगिता बहुत है लेकिन रजनीश मुझे कभी-कभी ही चोदता है।’ उस दिन के बाद से वो दोनों रोज़ एक दूसरे को नकली लंड से चोद कर मज़ा लेतीं और एक दूसरे की चूत को खूब चाटतीं।”

 

“एक दिन मम्मी बिस्तर पर आँखें बंद किये लेटी थी। उनकी टाँगें हवा में उठी हुई थी और मिली आँटी के चोदने का इंतज़ार कर रही थी। ‘मिली! अब जल्दी भी करो मेरी चूत में आग लगी हुई है.... मुझसे बर्दाश्त नहीं होता।’ मम्मी की बात सुन कर मिली आँटी ने नकली लंड उनकी चूत में घुसा दिया, लेकिन जैसे ही लंड घुसा कि मम्मी समझ गयी कि नकली नहीं असली लंड है। मम्मी ने आँखें खोली तो देखा कि रजनीश अंकल अपना लंड घुसाये उन्हें चोद रहे थे। मम्मी ने बिस्तर से उठना चाहा तो अंकल ने उन्हें कस कर बाँहों में पकड़ कर चोदते हुए कहा, ‘योगिता! जब ये असली लंड है तो तुम्हें नकली लंड से चुदवाने की क्या जरूरत है मम्मी ने भी कई दिनों से असली लंड का मज़ा नहीं लिया था। मम्मी भी उनका साथ देने लगी और मस्ती में चुदवाने लगी। बाद में मम्मी को पता लगा कि ये दोनों की मिली भगत थी। मम्मी ने बुरा नहीं माना। उस दिन से रजनीश अंकल  मम्मी को अकसर चोदने लगे।”

 

“एक दिन अंकल मम्मी और मिली आँटी को होटल के सूईट में ले आये और बोले कि आज यहाँ मज़े करेंगे। अंकल ने मम्मी और मिली आँटी को खूब शराब पिलायी। मम्मी ने मुझे आगे बताया कि हम लोग मस्ती कर रहे थे कि हमारी कंपनी से कोई राज आया और तुम्हारे अंकल ने हम दोनों को उसे सौंप दिया.... चोदने के लिये क्योंकि तुम्हारे अंकल ने उसकी बीवी और बहन को चोदा था। मैं साथ नहीं देना चाहती थी लेकिन जब मिली ने राज के लंड को देखा तो उसके मुँह में पानी आ गया। मैंने मना करना चाहा तो तुम्हारे अंकल ने कहा कि या तो मैं मन जाऊँ नहीं तो वो तुम्हारी चूत राज को दे देंगे। फिर मैं भी मान गयी और राज ने एम-डी के सामने ही हम दोनों को चोदा, उसने हमारी गाँड भी मारी। बस उस दिन से मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं रंडी बन गयी हूँ।”     इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

“मम्मी! राज का लंड बहुत मोटा और लंबा है ना? चुदवाने में बहुत मज़ा आता है ना? मैंने मम्मी से कहा। तुमने राज का लंड कब देखा और चखा? मम्मी ने पूछा। तब मैंने मम्मी को पूरी कहानी सुनाई, राज से चुदवाने से लेकर अंकल से चुदवाने तक। मेरी कहानी सुन कर मम्मी बोल पड़ी कि काश मैं भी प्रीती कि तरह तुम्हारे अंकल से बदला ले सकूँ। ‘मम्मी! आप चिंता ना करें..... मैं आपके साथ हूँ’, ‘मगर हम किस तरह बदला लेंगे मम्मी ने पूछा। अंकल की दोनों बेटियाँ है ना! ६ महीने बाद बड़ी बेटी इक्कीस साल की हो जायेगी और छोटी वाली एक साल के बाद। उनके इक्कीस्वें जन्मदिन पर उनका तोहफा होगा..... मोटा और लम्बा लंड उनकी चूत और गाँड में।”

 

“तुम्हारे दिमाग में कोई इंसान है? मम्मी ने पूछा। हाँ! मैं राज को तैयार कर लूँगी.... अब तुम लोग समझ गये होगे कि मुझे कैसे पता चला और क्या तुम दोनों मेरा साथ दोगे

 

“रजनी! एम-डी से बदला लेने में हम तुम्हारा पूरा साथ देंगे.....” मैंने उसे बाँहों में भरते हुए कहा।

 

“तुम्हारा प्लैन क्या है प्रीती ने पूछा।

 

“मेरा प्लैन ये है कि....”

 

!!! क्रमशः !!!


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